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श्रेणी: शिक्षा | बिहार | कौशल विकास | सरकारी भर्ती

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) ने देश की शिक्षा व्यवस्था को केवल डिग्री आधारित नहीं बल्कि कौशल आधारित (Skill-Based Education) बनाने पर विशेष जोर दिया है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha) के तहत देशभर के सरकारी विद्यालयों में Vocational Education (व्यावसायिक शिक्षा) का विस्तार शुरू किया।
बिहार में इस योजना का संचालन बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) द्वारा किया जा रहा है। राज्य के सैकड़ों सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विभिन्न ट्रेडों के लिए Vocational Trainer (VT) और Vocational Coordinator (VC) नियुक्त किए जाते हैं ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल भी सीख सकें।
हाल के वर्षों में BEPC ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाओं, ICT लैब, छात्र किट और शिक्षा गुणवत्ता सुधार से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं का कार्यान्वयन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, विशेषकर RailTel, को सौंपा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि परिषद अब बड़े पैमाने पर परियोजना आधारित निष्पादन (Project Implementation Model) को प्राथमिकता दे रही है।
बिहार में Vocational Education की वर्तमान स्थिति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा 6 से ही विद्यार्थियों को विभिन्न व्यवसायों का परिचय दिया जाना है।
बिहार के सरकारी विद्यालयों में वर्तमान में कई ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- Information Technology (IT-ITeS)
- Healthcare
- Retail
- Agriculture
- Beauty & Wellness
- Electronics
- Automotive
- Tourism & Hospitality
- Security
- Apparel
- Banking & Financial Services
इन ट्रेडों का उद्देश्य केवल सर्टिफिकेट देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षित करना है।
BEPC की भूमिका
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) राज्य में समग्र शिक्षा अभियान की नोडल एजेंसी है।
इसके प्रमुख कार्य हैं—
- सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
- NEP 2020 के प्रावधानों का क्रियान्वयन।
- Vocational Education का संचालन।
- PM SHRI विद्यालयों का विकास।
- ICT एवं Smart Classroom की स्थापना।
- Science एवं Computer Labs का निर्माण।
- शिक्षकों एवं प्रशिक्षकों की नियुक्ति एवं प्रशिक्षण।
RailTel को लगातार मिल रहे हैं बड़े शिक्षा प्रोजेक्ट
पिछले कुछ वर्षों में RailTel केवल रेलवे की दूरसंचार कंपनी नहीं रही, बल्कि वह शिक्षा क्षेत्र में भी एक प्रमुख सरकारी कार्यान्वयन एजेंसी बनकर उभरी है।
BEPC द्वारा RailTel को दिए गए प्रमुख कार्यों में शामिल हैं—
1. Smart Classroom स्थापना
सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में Smart Classrooms की स्थापना हेतु करोड़ों रुपये के कार्यादेश जारी किए गए।
2. ICT Labs
सरकारी विद्यालयों में Information & Communication Technology Labs की स्थापना का कार्य भी RailTel को सौंपा गया।
3. Science Laboratories
Physics, Chemistry एवं Biology Laboratories स्थापित करने के लिए लगभग ₹970 करोड़ का बड़ा कार्यादेश जारी किया गया।
4. PM SHRI Schools
PM SHRI योजना के अंतर्गत शिक्षा गुणवत्ता सुधार, डिजिटल अधोसंरचना और आधुनिक शिक्षण संसाधनों के विकास से संबंधित परियोजनाएँ भी RailTel को मिलीं।
5. Student Kits
सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए स्टूडेंट किट की आपूर्ति का कार्य भी RailTel को सौंपा गया।
यदि Vocational Trainer भर्ती भी ऐसी एजेंसियों के माध्यम से होती है तो इसका क्या अर्थ होगा?
यदि व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति का कार्य परियोजना-आधारित एजेंसियों के माध्यम से संचालित किया जाता है, तो इसके संभावित लाभ और चुनौतियाँ दोनों हो सकते हैं।
संभावित लाभ
- भर्ती प्रक्रिया का डिजिटलीकरण।
- राज्यव्यापी एकीकृत प्रबंधन।
- समयबद्ध नियुक्तियाँ।
- डिजिटल उपस्थिति एवं मॉनिटरिंग।
- प्रशिक्षण और रिपोर्टिंग की बेहतर व्यवस्था।
- उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान।
5. Career Progression
वर्षों तक सेवा देने के बावजूद नियमितीकरण या पदोन्नति की स्पष्ट नीति नहीं है।
राज्य के हजारों तकनीकी एवं व्यावसायिक योग्यताधारी अभ्यर्थी लंबे समय से नई भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
विद्यार्थियों को क्या लाभ होगा?
यदि प्रशिक्षकों की समय पर नियुक्ति होती है, तो—
- छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी।
- ITI, Polytechnic एवं Skill India से बेहतर समन्वय बनेगा।
- स्थानीय उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा।
- ग्रामीण विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी।
- स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
- ड्रॉपआउट दर में कमी आ सकती है।
आगे की राह
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को Employable Skills देना है। बिहार जैसे बड़े राज्य में यह तभी संभव होगा जब विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित Vocational Trainers उपलब्ध हों, उन्हें उचित कार्य-परिस्थितियाँ मिलें और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो।
निष्कर्ष
बिहार में व्यावसायिक शिक्षा का भविष्य काफी महत्वपूर्ण मोड़ पर है। BEPC द्वारा शिक्षा अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए RailTel जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बड़े पैमाने पर परियोजनाएँ सौंपना यह संकेत देता है कि राज्य शिक्षा प्रणाली को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हालाँकि, यह सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं है कि Vocational Trainer शिक्षकों की संविदा भर्ती का ठेका RailTel और केंद्रीय भंडार को प्रदान किया गया है। यदि भविष्य में ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी होता है, तो उससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और बेहतर प्रबंधन की उम्मीद की जा सकती है। साथ ही यह भी आवश्यक होगा कि प्रशिक्षकों के हितों, सेवा सुरक्षा और उचित मानदेय को समान प्राथमिकता दी जाए।
बिहार के लाखों विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल शिक्षा तभी सफल होगी जब प्रशिक्षकों को भी सम्मानजनक और स्थिर कार्य वातावरण प्राप्त हो
